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Saturday, December 4, 2021

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अब जिला नागरिक बादशाह खान अस्पताल में बनेगी मदर चाइल्ड हेल्थ यूनिट

फरीदाबाद (नेशनल प्रहरी/ रघुबीर सिंह ) : कई वर्षों से कागजों में सीमित मदर चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) यूनिट की योजना जल्द ही धरातल पर मूर्तरूप लेती दिखाई देगी। इसे लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.रणदीप सिंह पूनिया ने कवायद शुरू कर दी है। एमसीएच योजना को मंजूरी मिल गई है, न सिर्फ बनाने की मंजूरी मिली है बल्कि अब 100 की बजाय 200 बेड की यूनिट पर भी मुहर लग गई है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो नए साल में जनवरी के पहले सप्ताह से काम भी शुरू हो जाएगा। एमसीएच को बनाने का मुख्य उद्देश्य मातृत्व एवं शिशु मृत्युदर को शून्य करना है।
पहले नहीं हुई सफल कोशिशें : वर्ष 2011 से जिला नागरिक बादशाह खान अस्पताल में एमसीएच बनाने पर चर्चा चल रही थी और इसे कई बार मूर्त रूप देने की भी कोशिश की गई, लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.रणदीप सिंह पूनिया की गंभीर कोशिशों से एमसीएच की योजना को पंख लगते दिख रहे हैं। प्रस्ताव के तहत पीडब्ल्यूडी एमसीएच के भवन निर्माण का कार्य करेगा। एमसीएच पहले नागरिक अस्पताल के पीछे बनाई जानी थी, लेकिन आक्सीजन प्लांट की वजह से अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सामने स्थित पुराने अस्पताल के भवन को तोड़कर बनाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही पीडब्ल्यूडी से कंडम घोषित करवाकर भवन तुड़वाएगा।
जच्चा-बच्चा वार्ड होगा शिफ्ट : अभी अस्पताल के प्रथम तल पर जच्चा-बच्चा वार्ड चल रहा है। यहां पर रोजाना 25 से 30 गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए आती हैं। इसके लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से भी रेफर होकर गर्भवती नागरिक अस्पताल पहुंचती है। नागरिक अस्पताल में सामान्य एवं आपरेशन से डिलीवरी कराने की व्यवस्था हैं। यदि डिलीवरी के दौरान कोई जटिलता आ जाए, तो उसके लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं है। ऐसे में गर्भवती को रेफर करना पड़ता है। एमसीएच के निर्माण के बाद जच्चा-बच्चा वार्ड को यहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। ऐसे में जटिल मामलों का भी यहीं समाधान हो जाएगा।
अलग होगा स्टाफ : नागरिक अस्पताल परिसर में बनने वाली एमसीएच के लिए अलग से स्टाफ की नियुक्त होगा। स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है कि पहले भवन को बनवाया जाए, इसके बाद स्टाफ नियुक्ति की मांग की जाएगी। स्वास्थ्य निदेशालय से एमसीएच को बनाने की मंजूरी मिल गई है। निर्माण हो जाने पर महिला एवं बच्चों के इलाज संबंधी आधुनिक सुविधाएं होंगी। नीकू (एनआइसीयू) वार्ड होगा। यहां पर 50 से अधिक नवजात शिशुओं को रखने की क्षमता होगी।
वर्जन : इसके बनने के बाद गंभीरावस्था में आने वाली गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को सफदरजंग अस्पताल रेफर नहीं किया जाएगा और यहीं पर आपरेशन की भी सुविधा होगी। -डा. रणदीप सिंह पूनिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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