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Friday, November 26, 2021

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कांग्रेस प्रभारी की को‍‍शिशाें पर हुड्डा और सैलजा की खींचतान भारी: हरियाणा कांग्रेस में खत्म नहीं हो रहा टकराव

चंडीगढ़,(नेशनल प्रहरी/ संवाददाता ) : हरियाणा कांग्रेस में टकराव व कलह समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी विवेक बंसल के प्रदेश में लगातार दौरों व प्रयासों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा के बीच खींचतान कम हो नहीं रही है। कांग्रेस की सोशल मीडिया विंग को सक्रिय करने चंडीगढ़ पहुंचे विवेक बंसल ने हालांकि पिछले पांच माह के दौरान कांग्रेस दिग्गजों की गुटबाजी काफी हद तक कम होने का दावा किया है, लेकिन तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदेशभर में होने वाले आंदोलनों को लेकर हुड्डा और सैलजा गुट आमने-सामने है। हुड्डा अपने हिसाब से आंदोलन का संचालन कर रहे और सैलजा का अपना अलग स्टाइल है।
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के लगातार हरियाणा दौरों के बावजूद कम नहीं हो रही दिग्गजों की गुटबाजी
हरियाणा कांग्रेस ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में राज्यभर में आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए हर जिले में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए गए। प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा की ओर से जितने भी पर्यवेक्षक बनाए गए हैं, उनमें कोई हुड्डा समर्थक नहीं है। यह स्थिति तब है, जब राज्य में कांग्रेस के 30 विधायक हैं और इनमें 25 अकेले हुड्डा के पाले में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर खड़े हैं।
कांग्रेस विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी, पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव, उनके विधायक बेटे चिरंजीव राव तथा आदमपुर के विधायक कुलदीप बिश्नोई की अपनी अलग राजनीति है। कुलदीप, किरण और अजय तीनों ही कांग्रेस में हरियाणा के पहली पंक्ति के नेता हैं। असंध के विधायक शमशेर सिंह गोगी और नारायणगढ़ की विधायक शैली को सैलजा समर्थक माना जाता है।
सैलजा के बनाए जिला पर्यवेक्षकों में एक भी हुड्डा गुट का नहीं, अनदेखी की वजह भी मजबूत
कांग्रेस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति में जिस तरह से हुड्डा खेमे के नेताओं की अनदेखी हुई है, उससे बड़ा सवाल यह उभर रहा है कि जिला स्तर पर होने वाले आंदोलन कितने प्रभावी साबित हो सकेंगे। तस्वीर का दूसरा पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सैलजा ने राज्यभर में तीन से पांच फरवरी तक ब्लाक स्तरीय धरने-प्रदर्शनों के आयोजन का एलान किया था, लेकिन इन तीन दिनों के भीतर हुड्डा और उनके समर्थक अधिकतर विधायक फील्ड के बजाय चंडीगढ़ में जमे रहे।
ऐसे में सैलजा खेमे को यह अनुमान लगाने का पूरा अधिकार है कि यदि पर्यवेक्षकों के तौर पर आंदोलन की कमान फिर हुड्डा समर्थकों के हाथों में सौंप दी गई तो उनके सफल होने पर संदेह बना रहेगा। बता दें कि हुड्डा स्वयं, उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा और विधायक अपने-अपने हिसाब से तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। गठबंधन सरकार के विरुद्ध उनकी विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी योजना है।
हुड्डा खेमे में इस बात को लेकर भी खासा आक्रोश है कि अशोक तंवर के बाद सैलजा की नियुक्ति होने तक हरियाणा कांग्रेस का संगठन नहीं खड़ा हो पाया। इसके लिए हालांकि सैलजा को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा रहा, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी दुविधा प्रांतीय संगठन में हुड्डा, सैलजा, रणदीप, कुलदीप, कैप्टन और किरण के समर्थकों को उनकी मजबूती के आधार पर समायोजित करने की है। यही संकट अशोक तंवर के समय में था, जो अब सैलजा को झेलना पड़ रहा है।
दिल मिले न मिले पर हाथ मिलाते रहिए
कांग्रेस के नए प्रभारी विवेक बंसल ने अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार किया कि संगठन बनाने का काम बहुत मुश्किल है। सबको सुनना-समझाना-एडजेस्ट करना पड़ता है, लेकिन साथ ही बंसल इस बात को अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हैं कि उनके पांच माह के प्रभार के दौरान सभी कांग्रेस दिग्गजों को कई बार एक साथ एक मंच पर लाया जा चुका है। इसमें कांग्रेस के अच्छे भविष्य की तस्वीर देखी जानी चाहिए। यह अलग बात है कि प्रदेश की जनता को दिखाने के लिए यह कांग्रेस दिग्गज आपस में दिल नहीं मिलने के बावजूद हाथ मिलने का कोई मौका नहीं जाने देते।

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