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Saturday, July 31, 2021

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कोरोना वायरस से उबरने में चेस्ट फिजियोथेरेपी का कैसे है अहम रोल,जानें : डॉ जितेंद्र

पलवल (नेशनल प्रहरी/स्वास्थ्य डेस्क ): आज पूरा विश्व कोरोना जैसी भयानक बीमारी से जूझ रहा है और ऊपर से बढ़ते मरीजों की संख्या के अनुपात के हिसाब से भारत में संसाधनों की कमी है। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ जितेंद्र सिंगला ने बताया कि यह हमारा भी दायित्व और जिम्मेदारी बन जाती है कि हम सब अपने आप को व अपने प्रियजनों को भी स्वस्थ रखने में मदद करें।
पलवल के चर्चित फिजियोथैरेपिस्ट डॉक्टर डॉ.जितेद्र सिंगला ने कहा कि फिजियोथेरेपी के जरिए कोरोना संक्रमण के लक्षणों में सांस लेने में दिक्कत भी एक गम्भीर समस्या है। इसका सीधा संबंध फेफड़ों से है। कोरोना के अलावा फेफड़ों के ऐसे कई रोग हैं, जिन्हें खतरनाक समझा जाता है जैसे-अस्थमा, सीओपीडी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आदि। जब फेफड़े ठीक से काम नहीं करते या इससे जुड़ी गंभीर बीमारी हो तो डॉक्टर कुछ थेरेपी करवाते हैं। ये इनके इलाज में कारगर होती हैं। डॉक्टरी भाषा में इसी को चेस्ट फिजियोथेरेपी कहा जाता है। इसी को सीपीटी या चेस्ट पीटी भी कहते हैं।
डॉ जितेंद्र सिंगला ने बताया कि प्रशासन एवं सरकार द्वारा तमाम कोशिशें की जा रही हैं लेकिन ऐसे में कुछ जिम्मेदारियां हमारी भी बनती है बतौर फिजियोथैरेपी चिकित्सक यहां जन मानस को इस बात से अवगत कराना बेहद जरूरी है कि कोरोना वायरस सबसे पहले हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है जिससे कि उसकी ऑक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है जिससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लग जाता है इसी वजह से हमें सांस लेने में दिक्कत, थकान और अन्य परेशानी होने लगती है। ऐसे में हमारे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को नियंत्रित व उच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए फिजियोथैरेपी चिकित्सा के माध्यम से फेफड़ों को मजबूत रखा जा सकता है।
इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि तमाम लोग अपने फेफड़ों को मजबूत कैसे रखें जिससे उनके ऑक्सीजन का स्तर शरीर में सामान्य बना रहे और किसी भी परिस्थिति में हमें वेंटिलेटर की आवश्यकता ना पड़े। इससे एक बहुत बड़ा बदलाव लाया जा सकता है और डॉक्टरों की मदद की जा सकती है ताकि वह अति गंभीर रोगियों को आसानी से इलाज दे पाएं। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे संपर्क में आने वाले सभी व्यक्तियों को कुछ फिजियोथैरेपी से जुड़ी एक्सरसाइज से अवगत कराएं जिससे कि उनके फेफड़े मजबूत हो सके।
नियंत्रित सांस लेना: इस एक्सरसाइज में हमें अपने द्वारा ली जा रही सांस को महसूस करना होता है और उसे कुछ देर 5 या 6 सेकंड फेफड़ों में रोककर फिर धीरे-धीरे से बाहर निकालना होता है। छाती और पेट पर हाथ रखकर हम इसे महसूस कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज में हमें श्वास क्रिया पर ध्यान केंद्रित करना होता है।
डायफ्राग्मेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज: इसे करने के लिए शरीर को ढीला रखते हुए सीधे बैठ जाएं या लेट कर अपना एक हाथ अपनी छाती पर और दूसरा अपने पेट पर रखें, फिर धीरे-धीरे सांस को नाक से अंदर खींचते हैं और पेट को हाथ से हल्का सा दबा कर रखते हैं, जिससे यह महसूस होता है कि छाती ऊपर उठ रही है फिर सांस को मुंह से बाहर फूंक मारते हुए धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हैं। इस एक्सरसाइज को दिन में दो से तीन बार 5 से 10 बार दोहराएं।
पर्स लिप ब्रीदिंग एक्सरसाइज: यह एक्सरसाइज भी ऊपर वाले एक्सरसाइज की तरह ही करते हैं बस सांस को नाक से गहरा खींचने के बाद मुंह से छोड़ते समय अपने दोनों होठों को इस तरह से रखते हैं जैसे सीटी बजाते हैं और सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हैं।
छाती फुलाना: इस एक्सरसाइज में हमें गहरी सांस लेकर छाती के दोनों और अपने हाथों से दबाव बनाना होता है, जिससे फेफड़ों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इस एक्सरसाइज में हम अपने हाथों को छाती के दोनों ओर रखकर या टेबल का सहारा लेकर भी कर सकते हैं। इस कसरत में छाती के निचले हिस्से मध्य हिस्से और ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है ताकि हमें सांस लेने में परेशानी ना हो।
बलपूर्वक सांस छोड़ना: इस एक्सरसाइज को करने के लिए किसी बड़े गुब्बारे में हवा भरी जा सकती है, किसी मोमबत्ती को जोर से बुझाने की कोशिश की जा सकती है व किसी पतली स्ट्रॉ को लेकर पानी में फूंक मारकर बुलबुले पैदा किए जा सकते हैं।
इंटेंसिव स्पायरोमीटर एक्सरसाइज: इसके लिए केमिस्ट शॉप से स्पायरोमीटर एक प्रकार का ब्रीदिंग एक्सरसाइज यंत्र है जिसके 3 भाग होते हैं। इसमें एक चेंबर में तीन प्लास्टिक की गेंद पड़ी होती हैं, एक ट्यूब होती है तथा एक माउथपीस होता है जिसके सहारे सांस को अंदर खींचते हैं तथा बाहर छोड़ते हैं। इसमें प्रयोग के दौरान सबसे पहले फेफड़ों की सारी हवा को बाहर निकाल देते हैं तथा माउथपीस को होंठों में दबाते हुए धीरे-धीरे सांस को अंदर खींचते हैं, जिससे चेंबर में गेंद ऊपर उठती है। कोशिश करें कि तीनों गेंद एक साथ उठे पर ऐसा ना भी हो तो प्रयास करते रहें इससे फेफड़ों के प्रत्येक भाग में ऑक्सीजन पहुंचती है।
सांस रोकना और जोर से खांसना: इस एक्सरसाइज के लिए हमें सबसे पहले गहरी सांस लेकर उसे कुछ सेकंड के लिए रोक कर फिर तेजी से खांसना होता है। जिससे फेफड़ों में जमा बलगम या कफ निकलने में आसानी होती है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए छोटे बच्चों की तरह घुटनों के बल झुक कर भी किया जा सकता है। यह तमाम एक्सरसाइज सभी सामान्य व्यक्ति व कोरोना से ग्रस्त होम आइसोलेटेड मरीज भी कर सकते हैं। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में अपने नजदीकी फिजियोथैरेपी चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
इसके साथ-साथ बैठने तथा लेटने के तरीकों में बदलाव करके भी ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाया जा सकता है।1. सीधे लेटने के स्थान पर पेट के बल लेटने की कोशिश करें या फिर दाएं या बाएं करवट लेटें। इससे वेंटिलेशन में सुधार होता है और फेफड़ों की सबसे छोटी अल्वियोलर इकाई खुलती है और सांस लेना आसान हो जाता है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में पेट के बल लेट ना सही नहीं है जैसे के गर्भवती स्त्रियां, कोई भी हृदय संबंधी घातक रोग, किसी तरह का भी रीढ़ व किसी अन्य हड्डी का फ्रैक्चर। 2. बैठते समय सिर को नीचे झुका लें इससे भी फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
डॉक्टर जितेन्द्र सिंगला ने बताया कि यह तमाम एक्सरसाइज सभी को नियमित रूप से करनी चाहिए क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ भी इस बात को मान चुका है कि कोरोना संक्रमण काल में फिजियोथेरेपी चिकित्सा बेहद कारगर है फतेह हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि नियमित एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं जिससे की हॉस्पिटल्स के अंदर कुछ लोड कम हो सके और गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को उचित इलाज प्रदान किया जा सके। साथ ही इस दौरान हम सभी को मानसिक रूप से मजबूत रहने की आवश्यकता है किसी भी तरह का डर व भय हमारे अंदर की हड़बड़ाहट व बैचैनी को बढ़ा देता है। इसलिए दिमाग को पूरी तरीके से शांत रखें व हल्का खाना खाए।

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