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Saturday, October 23, 2021

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दिल्ली-वड़ोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे की राह में रोड़ा, मंत्रालय पहुंचा मामला, प्रदेश सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

फरीदाबाद (नेशनल प्रहरी/ रघुबीर सिंह ) : दिल्ली-वड़ोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू न होने का मामला केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय पहुंच गया है। एक्सप्रेस-वे की राह में रोड़ा बने बाईपास किनारे अवैध निर्माणों को अभी तक हटाया नहीं जा सका है। अब जब तक जगह खाली नहीं मिले, तब तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) उसे टेकओवर नहीं करेगी। अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की है। इस तरह बेहद महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है। परियोजना की राह की बाधाएं दूर न होती देख एनएचएआइ के अधिकारियों ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को पत्र लिखा है। इसके बाद मंत्रालय ने प्रदेश सरकार से मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
2018 में बनी थी योजना: एक्सप्रेस-वे की योजना 2018 में बनी थी। एक्सप्रेस-वे का पहला हिस्सा दिल्ली में डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू होकर मीठापुर तक 9 किलोमीटर, दूसरा मीठापुर से बल्लभगढ़ में मलरेना पुल तक 24 किलोमीटर और तीसरा मलेरना पुल से सोहना तक 26 किलोमीटर होगा। एक्सप्रेस-वे दिल्ली में डीएनडी फ्लाइओवर से शुरू होगा आगरा नहर के साथ-साथ सेक्टर-37 आकर बाईपास रोड से जुड़ना है।
कहां होगा कनेक्ट: आगे बल्लभगढ़ में कैल गांव के पास एक्सप्रेस-वे राष्ट्रीय राजमार्ग को पार करेगा और सोहना पहुंचेगा और कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे से कनेक्ट हो जाएगा। वहां से वड़ोदरा व मुंबई एक्सप्रेस-वे को लिक कर दिया जाएगा।
मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में: बाईपास को 12 लेन बनाने के लिए एनएचएआइ अधिकारियों को फरीदाबाद में 26 किलोमीटर तक कुल 70 मीटर जगह चाहिए, जिसे खाली करने के लिए अवैध निर्माणों को तोड़ना जरूरी है। यह जमीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को खाली करानी है। प्राधिकरण के हाल ही में प्रशासक प्रदीप दहिया के साथ 6 से 7 बार एनएचएआइ अधिकारियों की बैठक भी हुई थी। तोड़फोड़ की पूरी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन उनका तबादला होने के बाद से मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला गया है। गुजरात की कंपनी को एक्सप्रेस-वे बनाने का ठेका दिया जा चुका है।
वर्जन : कंपनी बार-बार जमीन पर कब्जा देने की मांग कर रही है। कभी भी कंपनी के अधिकारी एनएचएआइ पर हर्जाना डाल सकते हैं, क्योंकि काम शुरू होने में देरी हो रही है। इससे न केवल प्रोजेक्ट की डेड लाइन बढ़ेगी बल्कि अलाइमेंट को भी खतरा पैदा हो गया है। अब मामला मंत्रालय पहुंच गया है, उम्मीद है जल्द समाधान होगा। – धीरज सिंह, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआइ

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