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Saturday, October 23, 2021

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दुष्यंत चौटाला की बढ़ी परेशानी, जजपा के चार विधायकों के तीखे तेवर

चंडीगढ़ (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता) : हरियाणा विधानसभा में बुधवार को पेश होने जा रहे अविश्वास प्रस्ताव के गिरने को लेकर गठबंधन सरकार जहां पूरी तरह आश्वस्त है, वहीं जननायक जनता पार्टी के कुछ विधायकों के तीखे तेवर ने जजपा और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का सिरदर्द बढ़ा दिया है। अविश्‍वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले साेमवार को टोहाना से जजपा विधायक देवेंद्र बबली ने कृषि कानूनों को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए थे, तो मंगलवार को बरवाला से जजपा विधायक जोगीराम सिहाग, नारनौंद के विधायक रामकुमार गौतम और गुहला से विधायक और जजपा विधायक दल के उपनेता ईश्वर सिंह ने कई तीखे सवाल उठाकर अपनी पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
विधानसभा में जजपा विधायक तीखे सवालों से बढ़ा रहे अपनी ही सरकार की मुश्किलें: मंगलवार को विधानसभा में ईश्वर सिंह ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए अपनी बात शुरू की और फिर देखते ही देखते तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए। उन्होंने बजट में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कुल आवंटित राशि में से 40 फीसद हिस्सा जारी नहीं होने पर सवाल उठाए। अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग कल्याण मंत्री डा. बनवारी लाल ने कहा कि पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के तहत 14 हजार 977 करोड़ रुपये जारी हुए हैं जिनमें से वर्ष 2018-19 में 7367.29 करोड़ और वर्ष 2019-20 में 7610.18 करोड़ रुपये दिए गए।
जवाब से असंतुष्ट ईश्वर सिंह लगातार वित्त मंत्री से जवाब की मांग पर अड़े रहे जिसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वह बजट पर चर्चा के दौरान इसका जवाब देंगे। इसके बाद बीपीएल परिवारों को प्लाट आवंटन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में आखिरी बार 100 गज के प्लाट दिए गए थे। उसमें भी हकीकत में 54 फीसद लोगों को प्लाट मिले, जबकि शेष 46 फीसद को या तो जमीन पर कब्जा ही नहीं मिला या फिर पंचायतों ने इन्हें वापस ले लिया। बीपीएल परिवारों को प्लाट देने की योजना फिर शुरू की जानी चाहिए।
जजपा विधायक जोगीराम सिहाग ने कृषि कानूनों को लेकर खुलकर बैटिंग की। उन्होंने कहा कि नए कानूनों को लेकर प्रदेश के किसान आंदोलित, विचलित और उद्वेलित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र में परिस्थितियां चाहे जो हो, हरियाणा में हालात दूसरे हैं। जब प्रदेश में बाजरा, सरसों और कपास सहित अन्य फसलों की खरीद के लिए प्रदेश सरकार ने अलग से व्यवस्था की हुई है तो गेहूं और धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने में क्या दिक्कत है। प्रदेश सरकार अपना खुद का कानून बनाए जिससे किसानों को राहत मिले।
जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने कहा कि प्रदेश सरकार दो-तीन सालों के लिए नए कृषि कानूनों को निलंबित रखे। जब किसान राजी नहीं हैं तो उन पर नए कानूनों को क्यों लादा जा रहा है। इससे पहले जजपा विधायक देवेंद्र बबली ने सदन में कहा था कि हमारा लोगों खासकर किसानों के बीच में निकलना मुश्किल हो गया है।

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