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Friday, October 22, 2021

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नववर्ष और नई उम्मीदों का खुला आसमां…..

नया साल नई उम्मीदें, नए सपने और नए लक्ष्य और सब सपनों की उड़ान पूरा करने के लिए नई शुरुआत। नए साल में नए संकल्प और पुराने साल के साथ पुराने समय में हुई गलतियों को सुधार और हम फिर अपने सपनो को बुनने में लग जाते हैं। पिछला वर्ष किसी के भी मन और आशाओं के मुताबित नहीं रहा। हर कोई अपने आप को बन्धन में महसूस कर रहा था। ऐसा बन्धन जिसने जकड़ लिया था पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में, ऐसी गिरफ्त जिसने कई लोगों की जिंदगी को लील लिया। ऐसे में भय और आतंक का ऐसा माहौल पैदा हुआ । जो आज भी सिहरन पैदा कर देता है लेकिन पुराने साल के साथ हमें उन पुरानी स्मृतियों और बुरी यादों को तिलांजलि देकर जीवन में नई आशाओं के साथ बढ़ने का समय है। हमें अतीत में झांक कर जरूर देख लेना चाहिए ताकि हमारे भविष्य पर उसका असर नकारात्मक न हो। पिछले वर्ष में हमारे मन, कर्म और व्यवहार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में किसी को कष्ट पहुंचा हो तो हमें माफी मांग कर आगे बढ़ने से गुरेज नहीं करना चाहिए और कोई अगर अपनी गलतियों के लिए हम से माफी मांगे तो भी हमें उसे माफ कर जीवन में बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ना चाहिए। यूं तो पूरे विश्व में नया साल अलग-अलग दिन मनाया जाता है, और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी नए साल की शुरूआत अलग-अलग समय होती है। लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी से नए साल की शुरूआत मानी जाती है। चूंकि 31 दिसंबर को एक वर्ष का अंत होने के बाद 1 जनवरी से नए अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष की शुरूआत होती है। इसलिए इस दिन को पूरी दुनिया में नया साल शुरू होने के उपलक्ष्य में पर्व की तरह मनाया जाता है।
चूंकि साल नया है, इसलिए नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य, नए आईडियाज के साथ इसका स्वागत किया जाता है। नया साल मनाने के पीछे मान्यता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो साल भर इसी उत्साह और खुशियों के साथ ही बीतेगा।
हालांकि हिन्दू पंचांग के अनुसार के मुताबिक नया साल 1 जनवरी से शुरू नहीं होता। हिन्दू नववर्ष का आगाज गुड़ी पड़वा से होता है। लेकिन 1 जनवरी को नया साल मनाना सभी धर्मों में एकता कायम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, क्यों इसे सभी मिलकर मनाते हैं।
नया साल एक नई शुरूआत को दर्शाता है और हमेशा आगे बढ़ने की सीख देता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जिस प्रकार हम पुराने साल के समाप्त होने पर दुखी नहीं होते बल्‍कि नए साल का स्वागत बड़े उत्साह और खुशी के साथ करते हैं, उसी तरह जीवन में भी बीते हुए समय को लेकर हमें दुखी नहीं होना चाहिए। जो बीत गया उसके बारे में सोचने की अपेक्षा आने वाले अवसरों का स्वागत करें और उनके जरिए जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करें। हमेशा खुश रहे और मुस्कुराते रहें क्योंकि इससे आपके आसपास के लोगों में भी सकारात्मकता के भाव उत्पन्न होते हैं। जब आपके आसपास सकारात्मकता का माहौल होगा तो आपको सफलता जरूर मिलेगी। नए साल के अवसर पर हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के मानद महासचिव के पद पर होने के नाते मुझ पर प्रदेश के बच्चों के कल्याण का और उनके सपनों को उड़ान देने का जो कार्य भार है। उसे और अधिक ऊर्जा के साथ करने का प्रयास रहेगा। पिछले वर्ष आपदा ने हर किसी को घर में कैद कर दिया था लेकिन तब भी सपने उम्मीदें और आशाएं कैद नहीं हो पाई थी। उन उम्मीदों सपनों और आशाओं को हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्व स्तरीय मंच प्रदान किया। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय ऑनलाइन बाल महोत्सव ऐतिहासिक रहा और इसकी देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक में धूम रही।
परिषद् ने इस बड़ी आपदा को न केवल बड़े अवसर में बदल दिया बल्कि सभी के सामने एक अनूठा उदाहरण भी प्रस्तुत किया कि आपदाएं आती हैं तो आएं लेकिन अगर आपने कुछ करने का ठान लिया है तो आपको आसमां छूने से कोई रोक ही नहीं सकता। इस वर्ष उम्मीद है कि बाल कल्याण से जुड़ी गतिविधियां संभव हो सकेंगी। बाल कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं पर बड़े स्तर पर कार्य हो रहा है। जिनका प्रदेश के सभी बच्चों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। इसके साथ-साथ मैं आप सभी से यह अनुरोध करना चाहता हूँ कि बच्चों पर पढ़ाई व अन्य किसी भी कार्य का अनावश्यक बोझ न डालें। क्योंकि यह कहीं ना कहीं उन्हें मानसिक रूप से बंधन में बांधता है और उनका शारीरिक व मानसिक विकास इससे पूरी तरह प्रभावित होता है। बच्चों को उनका बचपन खुलकर जीने दे। उनके बचपन के हत्यारे न बने। ऐसा करके हम उनके सपनों की उड़ान को बांध रहे होते हैं। हमें चाहिए कि अपने बच्चों को न सिर्फ सपने देखने दे बल्कि उनके सपनों को पूरा करने में उनका पूरा सहयोग करें। मैं यकीन दिलाता हूं कि हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद बड़े मंच के माध्यम से सभी बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए इसी तरह भविष्य में भी प्रयासरत रहेगी। बच्चों के कल्याण के साथ-साथ आप सभी के कल्याण और मंगल हो की भावना के साथ सभी को नव वर्ष की एक बार फिर बधाई और शुभकामनाएं……
लेखक कृष्ण ढुल
वर्तमान में हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के मानद महासचिव के पद पर कार्यरत हैं

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