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Saturday, December 4, 2021

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बजट में एफपीओ को 700 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा: किसान बड़ी कंपनियों के साथ भी कर पायेंगे करार

नई दिल्ली (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता ) : 2021-22 के केन्द्रीय बजट में कृषि पर जोर दिया गया है, जो किसानों की आय बढ़ाते हुए देश को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जायेगा। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा भी है, इस बजट के दिल में गांव और किसान हैं। बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सबसे अधिक छोटे किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि उत्पादन संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देने के लिए 700 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की है, ताकि एफपीओ के माध्यम से किसान समूह बना कर खेती कर सकें और अपनी आय बढा़ सकें। समूह में खेती करते हुए किसान बड़ी कंपनियों के साथ करार भी कर पायेंगे और अपने हित भी सुरक्षित रख पायेंगे। इसके अलावा, एपीएमसी मंडियों की बेहतरी के लिए लोन सुविधा देने की घोषणा की गई है।
इस बजट में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास फंड के लिए पेट्रोल-डीजल पर नया कर लगाने के साथ ही, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं लायी गई हैं। ऑपरेशन ग्रीन स्कीम के अंतर्गत पहले से ही शामिल आलू, प्याज और टमाटर के साथ अब कुल 22 उत्पादों को शामिल किया गया है और इन उत्पादों के प्रसंस्करण, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और निर्यात को बढ़ावा दिया जायेगा। जिन प्रमुख केन्द्रीय योजनाओं के लिए बड़ा आवंटन किया गया है, उनमें पीएम-किसान और पीएम-आशा शामिल हैं। सरकारी ख़रीद के आंकड़े पेश करते हुए सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार किसानों की बेहतरी के रास्ते से पीछे नहीं हट सकती। सरकार ने उपज की सरकारी ख़रीद लगातार बढ़ाई और लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉटन पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इससे घरेलू बाजार में कॉटन का मूल्य बढ़ने के आसार है जिसका फायदा किसानों को मिलेगा। अभी तक कॉटन के आयात पर कोई कर नहीं लगता था, जिसके कारण बाहर से आने वाले कॉटन का मूल्य कम होने से घरेलू किसानों को नुकसान होता था। राष्ट्रीय कृषि बाजार या ई-नाम भारत में कृषि वस्तुओं के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। ई-नाम के अतंर्गत अब तक 1.68 करोड़ किसानों का पंजीकरण किया गया है और 1.44 रुपये व्यापार मूल्य हासिल किया गया है। कृषि बाजारों में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए 100 और मंडियों को ई-नाम के अंतर्गत लाया जायेगा। किसान सम्मान निधि दो साल में 40 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इस बजट में 16.5 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज देने का लक्ष्य भी रखा गया है।
बजट 2021-22 से स्पष्ट है कि मोदी सरकार किसानों के भले के लिए चली आ रही किसी भी पारंपरिक व्यवस्था को ख़त्म नहीं करने जा रही है, लेकिन पारंपरिक व्यवस्था से किसान की बेहतरी संभव नहीं दिख रही है, इसीलिए पारंपरिक के साथ आधुनिक व्यवस्था को भी तेज़ी से लागू किया जायेगा।

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