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Sunday, October 24, 2021

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बेटा खोने का क्या होता है गम, कोई इस अभागे पिता से जाने, 10 सालों से भर रहे हैं सडक़ों के गड्डे

फरीदाबाद (नेशनल प्रहरी/ रघुबीर सिंह ): यह आदमी पिछले 10 सालों से न्याय पाने की लिए ठोंकरे खा रहे हैं। इस व्यक्ति का दुर्भागय है कि उनका एक छोटा सा मासूम बच्चा सडक़ पर बने गड्डे की वजह से उनसे हमेशा के लिए दूर चला गया। वह अपने बेटे को तो खो चुके हैं, मगर कोई और परिवार इसका शिकार ना बनें, इसलिए वह दस सालों से सडक़ों पर बनें गडडों को खुद ही भर रहे हैं। सरकार की लापरवाही और दोषी अधिकारियों को सजा दिलवाने के लिए वह हाईकोर्ट में भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं।
आज शहर के बहुत से समाजसेवियों ने इस इस अभागे व्यक्ति मनोज वधवा की मुहिम में उनका साथ दिया और कंधे से कंधा मिलाकर दोषी अधिकारियों को सजा दिलवाने की मांग को मुखर कर दिया। इन सभी ने शहर की सडक़ों पर बनें गडडों को भरने में उनका साथ देकर सरकार को आईना दिखाने का काम भी किया है।
साल 2014 की है घटना: 10 फ़रवरी 2014 की रात जब मनोज वाधवा अपनी पत्नी टीना और 3 साल के बच्चे पवित्र के साथ बल्लभगड़ से फरीदाबाद अपने घर लोट रहे थे तो उन्होंने नहीं सोचा था कि ये रात काफी लम्बी और काली होने वाली है! फरीदाबाद नेशनल हाईवे 2 पर बाटा मोड़ पे बने बड़े बड़े गड्डों की वजह से उनकी 2 व्हीलर का बैलेंस बिगड़ गया और वे तीनों वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग की रोड पे बने गड्डों में गिर गए! जब मनोज ने अपने बच्चे को उठाया तो वो कुछ बोल नहीं रहा था, उनकी पत्नी टीना के पैरों से पीछे से आता एक वाहन उनके दोनों पैरों को रौंदता हुआ चला गया! पवित्र के चेहरे पर खून था, पवित्र को इस अवस्था में देख कर मनोज के होश उड़ गए! पीछे से आते राहगीरों ने विश्वास दिलाया कि वो पवित्र को जल्द हॉस्पिटल पंहुचा देंगे! मनोज ने कुछ और राहगीरों की मदद से टीना को भी हॉस्पिटल पहुंचाया! मनोज ने अपने बच्चे पवित्र का पता किया तो उन राहगीरों ने बताया कि हॉस्पिटल वाले बोल रहे हैं कि बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है।
इस तरह हुआ एक्सीडेंट: ये सुन कर मनोज के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी! एक बाप पर क्या गुजरी होगी ये सुनकर कि उसका 3 साल का मासूम बच्चा उसे छोड़ कर सिर्फ इसीलिए चला गया क्योकि कुछ लापरवाह अफसरों ने सड़क पे कातिल गड्ढे छोड़ दिए थे। पवित्र की मौत सड़क पे निकले नुकीले पत्थरों की वजह से हुई थी और उनकी पत्नी टीना के पैर पीछे से आते हुए वाहन ने कुचल दिए! पहले तो डॉक्टर्स ने टीना के पैर काटने तक की सलाह दे दी थी और बाद में टीना को बड़ी मुश्किल से 23 ऑपरेशन कर के बचाया जा सका! शुरुवात में टीना को उसके बच्चे की मौत की जानकारी नहीं दी गयी थी वरना वो उस समय जरुरी इलाज लेने से मना कर सकती थी। पुलिस ने इसी मोके का फायदा उठा कर एक सड़क के गड्ढे से मौत के केस को हिट एंड रन में बदल दिया। और गड्डों के लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारीयों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करी! बल्कि पवित्र की मौत सड़क पे निकले नुकीले पत्थरों की वजह से हुई थी! उनमें से कुछ पत्थरों ने उसके फेफड़े को फाड् दिया था और चेहरे पर भी काफी चोंट आई थी।
मनोज ने हाई कोर्ट का किया था रुख: घटना के कुछ महीनों के बाद मनोज ने मई 2014 में फरीदाबाद पुलिस के उच्च अधिकारीयों (जॉइंट कमिश्नर भारती अरोड़ा) को शिकायत करी, और कहा कि पुलिस की जांच गलत दिशा में चल रही है , मामला सड़क के गड्डे से मौत का था और पुलिस उसे हिट एंड रन बता रही थी! जून 2014 की ACP & DCP ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट में NHAI को दोषी भी माना गया, और कहा कि NHAI को कई पत्र लिख कर सड़क के गड्ढे रिपेयर कराने को कहा गया मगर NHAI ने समय रहते गड्ढे नहीं भरवाए! मगर इस रिपोर्ट के बावजूद भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई! जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो 2016 में मनोज ने हाई कोर्ट का रुख किया! हाई कोर्ट ने माना कि फरीदाबाद पुलिस को सड़क के गड्डों के जिम्मेदार अधिकारीयों के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए था। हाई कोर्ट ने फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर को पार्टी बनाया और पुलिस कमिश्नर ने इसी संदर्भ में SIT बनाई! SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में L&T और रिलायंस (DA TOLL ROAD) कंपनी, उनके प्रोजेक्ट हेड और कंपनी डायरेक्टर्स को दोषी माना और धारा 304 (A ) में 2018 में फरीदाबाद ट्रायल कोर्ट में चालान पेश कर दिया।
जब कोर्ट ने पूछा तो: जब कोर्ट ने पूछा तो फरीदाबाद पुलिस ने L&T कंपनी के 15 बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स का नाम कोर्ट में दिया तो L&T के वकील इन 15 डायरेक्टर्स का नाम चालान से हटवाने हेतु 2019 में दोबारा हाई कोर्ट की शरण में चले गए! तो माननीय हाई कोर्ट के जज ने L&T कंपनी के चेयरमैन से कहा कि आप इस मामले में हाई कोर्ट में एफिडेविट दीजिये और बताइये कि आपका कौनसा डायरेक्टर और उच्च अधिकारी उस समय सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार था, क्योकि किसी उच्च अधिकारी की तो जिम्मेदारी बनती है ।
L&T चेयरमैन और फरीदाबाद पुलिस, दोनों ही अपना अपना जवाब हाईकोर्ट को दे चुके हैं। फरीदाबाद पुलिस का कहना है कि उन्होंने सही कार्यवाही करी , और इसमें L&T कंपनी के डायरेक्टर्स की जिम्मेदारी बनती है। और L&T कंपनी के चेयरमैन का कहना है कि उनका कोई भी डायरेक्टर दोषी नहीं है। तब से फरीदाबाद कोर्ट में सुनवाई रुकी हुई है और हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 11 फ़रवरी को होना है! जिसमे हाईकोर्ट को निर्धारित करना है कि क्या कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ भी कोई मामला बनता है या नहीं।
जारी रहेगी लड़ाई: घटना के 7 साल बाद मनोज और टीना चाहते हैं कि जो घटना हमारे साथ हुई वो किसी और के साथ ना हो! वो चाहते हैं कि सड़क के गड्ढे के लिए जिम्मेदार सरकारी और प्राइवेट कंपनी के अधिकारीयों के खिलाफ सख्त सजा के प्रावधान बनाना चाहिए। इस बाबत वो अलग अलग पोलिटिकल पार्टी के नेताओं, विधायक, सांसद अदि से मिल कर उन्हें अपना प्रपोजल देते रहते हैं । उन्होंने कई बार अलग अलग राज्यों के मुख्या मंत्रियों , हाई कोर्ट के मुख्या न्यायाधीशों को पत्र लिख कर ये मांग रखी है । जिसमे सड़क के गड्डों के जिम्मेदार अधिकारीयों की जवाबदेहि और गड्डे से दुर्घटना से बचाव के उपाय साझा किये।
ये सभी रहे मौजूद : इस मोके पर मनोज वाधवा के साथ बलजीत कौशिक, योगेश धींगड़ा, रेनू खट्टर, रोहित, दिनेश, अरुण, आशुतोष, S.K. शर्मा, डॉक्टर सौरभ (Dist Apic President), गौरव धींगड़ा, विनोद कौशिक, उमेश अरोरा, विकास कालिया, अभय झांगरा, आभा झांगरा, मनोहर सोंधी व उनकी पत्नी, राजेश शर्मा, सतेंद्र दुग्गल (विंग कमांडर), एस एल भाटिया, दीपक चौधरी (पार्षद), अजय कोस्वाल और शहर के कईं जागरूक लोग उपस्थित रहे।

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