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Saturday, October 23, 2021

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भारत को अभी और सुधारों की जरूरत :अमिताभ कांत

नई दिल्ली (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता ) : नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने मंगलवार को कहा कि भारत में कड़े सुधारों को लागू करना मुश्किल है, क्योंकि यहां ‘बहुत ज्यादा लोकतंत्र’ है, और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अभी और अधिक सुधारों की जरूरत है। स्वराज्य पत्रिका द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, कांत ने पहली बार कहा कि केंद्र ने खनन, कोयला, श्रम, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में कड़े सुधार किए हैं, और सुधारों की अगली लहर को राज्यों द्वारा आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “भारतीय संदर्भ में कड़े सुधारकरना बहुत कठिन हैं, हमारे पास लोकतंत्र कुछ अधिक है … आपको इन सुधारों (खनन, कोयला, श्रम, कृषि) को पूरा करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है तथा कई और सुधार अभी किये जाने हैं।”
कांत ने बताया कि कड़ी मेहनत के बिना चीन के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करना आसान नहीं है। “इस सरकार ने कड़े सुधार करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रदर्शित की है।
नीति आयोग के सीईओ ने जोर देकर कहा कि सुधारों की अगली लहर राज्यों से उठनी चाहिए। उन्होंने कहाकि “अगर 10-12 राज्य ऊंची दरों पर प्रगति करेंगे, तो कोई कारण नहीं है कि भारत की प्रगति दर ऊंची न रहे। हमने केंद्र शासित प्रदेशों से डिस्कॉम का निजीकरण करने के लिए कहा है। डिस्कॉम को अधिक प्रतिस्पर्धी बनना चाहिए और सस्ती बिजली प्रदान करनी चाहिए।”
केंद्र के नये कानूनों के खिलाफ, किसानों, मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा से आये किसानोंके विरोध से संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए,कांत ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बना रहेगा, मंडियां भी रहेंगी … किसानों के पास अपने उत्पादों को बेचने का विकल्प रहना चाहिए, क्योंकि इससे वे फायदे में रहेंगे।”
भारत में इलेक्ट्रिक बैटरी बनाने के लिए कच्चा माल प्राप्त करने के संबंध में, कांत ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर में बड़ी मात्रा में लिथियम उपलब्ध है, जिसका उपयोग बैटरी बनाने में किया जाता है। “हमें नहीं लगता कि लिथियम की कोई कमी है।
मोदी सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल पर, उन्होंने कहा कि यह भीतर की तरफ देखना नहीं है, बल्कि भारतीय कंपनियों की क्षमता को उजागर करना है।
कांत ने कहा कि सरकार ने प्रॉडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव्स (पीएलआई) योजना के लिए 10मुख्य क्षेत्रों की पहचान की है और ये क्षेत्र भारत को एक मैन्यूफैक्चरिंग केंद्र बनाने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे और देश को बड़ी अर्थव्यवस्था बनायेंगे, ।
उन्होंने कहा कि “पीएलआई योजना इन क्षेत्रों को निर्यात हेतु 4-5 वर्षों के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करने जा रही है। यह कहते हुए कि भारत को तकनीकी रूप से छलांग लगानी चाहिए, कांत ने कहा कि देश के लिए नये और विकासशील उद्योगों में शामिल होना महत्वपूर्ण है।
कांत ने यह भी कहा कि रसद लागतों को नीचे लाने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि देश को निरंतर और सुव्यवस्थित शहरीकरण भी करना चाहिए जो विकास का अगला बड़ा चालक है।
कांत ने कहा कि अब तक सरकार का समर्थन उत्पाद लाइनों के 90 प्रतिशत और निर्यातकों के 86 प्रतिशत के लिए था, और फिर भी भारत का निर्यात नहीं बढ़ रहा था। “हमें निजी उद्यमों को वैश्विक मंच पर कामयाब होने के लिए एक वातावरण बनाने की आवश्यकता है।

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