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Tuesday, August 3, 2021

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मनोहर लाल ने किया धीरा खंडेलवाल द्वारा रचित दो नए कविता संग्रहों ‘मेघ मेखला’तथा‘रेशमी रस्सियां’ का लोकार्पण

‘मेघ मेखला’ शक्ति का प्रतीक और ‘रेशमी रस्सियां’ हैं सुखद बंधन का प्रतीक: धीरा खंडेलवाल
चंडीगढ़ (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता):
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती धीरा खंडेलवाल द्वारा रचित दो नए कविता संग्रहों ‘मेघ मेखला’तथा‘रेशमी रस्सियां’ का लोकार्पण किया। कार्यक्रम का आयोजन हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा किया गया था।
इस अवसर पर श्रीमती धीरा खंडेलवाल को बधाई देते हुए मनोहर लाल ने कहा कि उनके संग्रह की लगभग सभी पंक्तियाँ बेहद आत्मीय तथा मार्मिक हैं। उनके अथाह गहराइयों से निकले ये मोती पाठकों को अन्दर तक उद्वेलित करते हैं।
महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि आज के दिन श्रीमती धीरा खंडेलवाल के कविता संग्रहों का लोकार्पण एक विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस वर्ष से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।
श्रीमती धीरा खंडेलवाल के नए कविता संग्रहों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक भावों को समेटने की कला श्रीमती धीरा खंडेलवाल से सीखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि मर्मस्पर्शी भाषा शैली में लिखी सभी कविताएं रुचिकर और प्रेरणादायक हैं। कल्पना को सीमित शब्दों में कलमबद्ध करना वास्तव में एक सराहनीय कार्य है।
उन्होंने कहा कि श्रीमती धीरा खंडेलवाल न केवल सक्षम और कुशल अधिकारी हैं, बल्कि एक संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। वे जिन्दगी के अथाह विशाल भण्डार से विषय चुनने में माहिर हैं और इन विषयों को बड़ी सरल जबान, दिलचस्प बयान तथा स्वाभाविक अंदाज में बड़ी सफलता के साथ अन्तिम चरण तक ले जाती हैं। इससे पहले उनके चार कविता-संग्रह- ‘मुखर मौन’, ‘सांझ सकारे’ ‘ख्यालों के खलिहान’ ‘अंतर आकाश’ और दो हाइकु संग्रह ‘तारों की तरफ’ व ‘मन-मुकुर’ प्रकाशित हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमती धीरा खंडेलवाल की इतनी अधिक रचनाओं के बारे में जानकर आचर्य भी होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रशासनिक जीवन की व्यस्तताओं से खूब परिचित हैं। महिला होने के नाते श्रीमती धीरा खण्डेलवाल को अपने घर को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती है। इतने सारे कामों के बावजूद इन्होंने साहित्य-सृजन के लिये समय निकाला। यह हम सबके लिये प्रेरणा की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार आम लोगों के दुख-दर्द के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इसलिए जब एक अधिकारी एक कवि या साहित्यकार भी होता है, तो वह आम जनता के दुख-दर्द को ज्यादा अच्छी तरह से जान-समझ सकता है और उसे दूर करने का प्रयास भी करता है। उन्होंने कहा कि हम साहित्यकारों का पूरा सम्मान करते हैं और साहित्य-सृजन को प्रोत्साहन देने के लिए कृत-संकल्प हैं। साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाओं द्वारा समाज की स्थिति को प्रतिबिम्बित करने के लिए सजग प्रहरी के रूप में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि आज भी साहित्यकार देश में व्याप्त ज्वलन्त समस्याओं के प्रति हमारे समाज व प्रशासन को सजग करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि उच्चकोटि का साहित्य चाहे वह किसी भी भाषा में रचा गया हो, राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होता है। साहित्यकार की कलम जो रास्ता समाज को दिखा सकती है, वह कोई और नहीं दिखा सकता। इसमें लोगों की चिंतन धारा को बदलने की ताकत है।
उन्होंने कहा कि आज विश्व में वैज्ञानिक विकास के कारण मानव जीवन जितना सुविधाजनक हुआ है, वहीं मानव सभ्यता के विनाश का खतरा भी पैदा होता जा रहा है। इन परिस्थितियों में साहित्य का पठन-पाठन मानव सभ्यता को सही दिशा प्रदान करने में समर्थ है।
मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा का साहित्य एवं लोक संस्कृति काफी समृद्ध है। आज हरियाणा में कला और साहित्य-सृजन के लिए बड़ा अच्छा माहौल है। हरियाणा सरकार कला, साहित्य व संस्कृति के संरक्षण एवं विकास के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि विख्यात साहित्यकारों के जीवन और सृजन से युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनके नाम पर पुरस्कार स्थापित किए गए हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘युवा साहित्य पुरस्कार’ शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार साहित्य के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ाएगा।
राज्य में साहित्य के प्रचार के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में हिन्दी एवं हरियाणवी, उर्दू, संस्कृत और पंजाबी साहित्य के विकास के लिए अलग-अलग अकादमियां स्थापित की गई हैं। इन अकादमियों के बजट में भी कई गुणा बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि इन अकादमियों द्वारा हिन्दी, हरियाणवी, पंजाबी, उर्दू, संस्कृत साहित्य में योगदान देने वाले साहित्यकारों को हर वर्ष नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
इससे पूर्व इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विजय वर्धन ने कहा कि श्रीमती धीरा खंडेलवाल की कविताएँ हमेशा आशा की एक किरण दिखाती हैं और उनके लेखन में हमेशा आशावाद की भावना रहती है। वह हमेशा कुछ शब्दों में अधिक से अधिक अभिव्यक्ति व्यक्त करने की कोशिश करती हैं।
मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डी.एस. ढेसी ने कहा कि श्रीमती धीरा खंडेलवाल के पास एक बड़ा प्रशासनिक अनुभव है और समय के साथ-साथ उनके साहित्यिक कौशल में काफी सुधार हुआ है। अपने लेखन के माध्यम से, वह जीवन के दर्शन को सरल और सटीक तरीके से प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमती खंडेलवाल को साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र प्रो. लालचंद गुप्त ‘मंगल’ ने कहा कि अपनी रचना के माध्यम से श्रीमती धीरा खंडेलवाल जीवन की तमाम संगतियों-विसंगतियों के बीच संतुलन साधकर अपने और दूसरों के लिए कुछ ख़्वाब बुनने की चाहत लेकर जीवन के सुनहरे पलों को ढूंढने निकली हैं।
केंद्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि श्रीमती धीरा खंडेलवाल ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होने के अलावा एक संवेदनशील लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई है।उन्होंने कहा कि लगभग एक दर्जन से अधिक कविता संग्रह उनकी प्रतिभा एवं साहित्यिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण तथा प्रतिबद्धता के जीवन्त प्रमाण हैं।
पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ.गुरमीत सिंह ने श्रीमती धीरा खंडेलवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह आत्मविश्वास से भरी कवयित्री हैं और उनके लेखन में प्रयोग करने के प्रति एक मजबूत लगन और उत्साह है।
सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती धीरा खण्डेलवाल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को उनके नए कविता संग्रहों का लोकार्पण करने के लिए अपना बहुमूल्य समय देने हेतु धन्यवाद दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री को राज्य में साहित्य को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता और युवा पीढ़ी को लेखन के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए उनको धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने साहित्य के प्रचार और साहित्यकारों के कल्याण के लिए नई योजनाओं को तैयार करने के लिए राज्य में अकादमियों को हमेशा प्रोत्साहित किया है। इसके अलावा, अकादमियों के बजट में भी काफी वृद्धि की गई है।
श्रीमती खंडेलवाल ने कहा कि वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें बचपन से ही साहित्य लेखन का माहौल मिला है। उन्होंने कहा कि उनका नया संग्रह ‘मेघ मेखला’ शक्ति का प्रतीक है और ‘रेशमी रस्सियां’ सुखद बंधन का प्रतीक है।
इस अवसर पर राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी. के. दास, लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.एन. रॉय, राज्यपाल हरियाणा की सचिव श्रीमती जी. अनुपमा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव अमित कुमार अग्रवाल, हरेरा गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. के. के. खंडेलवाल, हरियाणा साहित्य अकादमी और हरियाणा उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा, राज्य की सभी अकादमियों के उपाध्यक्ष और निदेशक, राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लेखक और साहित्यकार उपस्थित थे।

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