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Saturday, November 27, 2021

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ह‍रियाणा में अवैध कालोनियों का फर्जीवाड़ा बंद

कृषि योग्य जमीन की रजिस्ट्री में छूट, एक एकड़ से नीचे की जमीनों की रजिस्ट्री के लिए एनओसी जरूरी
सात-ए के दायरे में होने वाली रजिस्ट्रियां सरकार ने बंद
चंडीगढ़ (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता) :
हरियाणा सरकार ने राज्य में अवैध कालोनियां पनपने का रास्ता बंद कर दिया है। प्रदेश सरकार ने अभी तक बिना किसी जांच और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के हो रही रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। नई व्यवस्था के मुताबिक अब एक एकड़ से कम गैर कृषि जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। राज्य सरकार ने सिर्फ कृषि योग्य जमीन की रजिस्ट्री किए जाने की छूट प्रदान की है। यह व्यवस्था उन स्थानों पर लागू होगी, जहां सात-ए का नियम अमल में लाया जाता रहा है।
हरियाणा सरकार ने सात-ए के दायरे में एक एकड़ से कम गैर कृषि जमीन की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया: शहरों के साथ लगते गांवों की जमीन सात-ए के दायरे में आती है। कालोनाइजर इसी जमीन को एकमुश्त खरीद लेते हैं और अधिकारियों से मिलीभगत कर छोटे-छोटे प्लाट काटकर बेच देते हैं। पूर्व में इन प्लाटों की रजिस्ट्री मोटे लेनदेन के आधार पर की जाती रही है। तब कोई दस्तावेज भी नहीं देखे जाते थे।
ऐसे करीब 50 हजार केस सामने आ चुके हैं, लेकिन अब शहरों के साथ लगते गांवों की जमीन की सात-ए के दायरे में होने वाली रजिस्ट्रियां सरकार ने चौक (बंद) कर दी हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए माना कि सात-ए का काफी दुरुपयोग हुआ है। इसकी शिकायतें भी आई। जांच हुई तो पता चला कि कई स्तर पर खामियां बरती गई।
कृषि योग्य जमीन की रजिस्ट्री में छूट, एक एकड़ से नीचे की जमीनों की रजिस्ट्री के लिए एनओसी जरूरी: मुख्यमंत्री मनाेहरलाल ने स्प्ष्ट किया कि अब जहां सात-ए लागू है, वहां गैर कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी। सरकार रजिस्ट्रियों में आने वाली तमाम कठिनाइयों को दूर करने में लगी है। इसका लाभ यह होगा कि अनाधिकृत कालोनियां नहीं बन पाएंगी। अभी तक अवैध कालोनियां बनती जाती थी और कालोनाइजर व लोग मिलकर उन्हें अपूर्व करने का दबाव सरकार पर बनाते थे। पिछली सरकारों ने भी कालोनियां अप्रूव की और हमने भी की, लेकिन अब आगे से यह खेल नहीं चलेगा।
मनोहर लाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि एक एकड़ से नीचे जो भी जमीन होगी, उसकी रजिस्ट्री के समय एनओसी जरूर लेनी होगी। एनओसी के लिए एक अलग पोर्टल बनाया गया है। यह पोर्टल खुद बता देगा कि जमीन रजिस्ट्री के लायक है या नहीं अथवा यदि रजिस्ट्री होनी है तो कितना पैसा किस मद में सरकार का बकाया है, ताकि उसका भुगतान करने के बाद एनओसी के आधार पर आगे बढ़ा जा सके।
फर्जी रजिस्ट्रियां रद कराने को अदालत के झंझट से मुक्ति: मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने बताया कि फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के लिए हमने राजस्व अधिकारियों को सही दस्तावेज देखकर रजिस्ट्री स्वीकृत या रद करने की शक्तियां दी हैं, ताकि असली भू-स्वामी को फर्जी रजिस्ट्री रद कराने के लिए अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।
उन्‍होंने कहा कि गड़बड़ी रोकने के लिए रजिस्ट्री के समय प्रस्तुत किए जाने वाले विभिन्न विभागों, बोर्ड एवं निगमों के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) आनलाइन जारी किए जाएंगे। अब तक 85 हजार प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। 49 हजार आवेदन ऐसे थे, जिनमें कोई न कोई खामी थी, लेकिन इनमें से 44 हजार आवेदनों की आपत्तियां जांच के बाद दूर की जा चुकी हैं।

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