करनाल में उपचुनाव 25 मई को, सीएम सैनी ठोकेंगे ताल

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● पूर्व सीएम मनोहर लाल के इस्तीफे के बाद खाली हुई विधानसभा सीट
चंडीगढ़ (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता)।
करनाल विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा के साथ ही उपचुनाव होगा। पूर्व सीएम मनोहर लाल के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई है। शुक्रवार को करनाल सीट के खाली होने की अधिसूचना जारी हुई थी। चुनाव आयोग ने करनाल हलके के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम भी शनिवार को जारी कर दिया। इस सीट पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उपचुनाव लड़ेंगे। करनाल हलके में 25 मई को मतदान होगा।
13 मार्च को मनोहर लाल ने विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में विधायक पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। इससे पहले, 12 मार्च को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और उनकी जगह पार्टी ने नायब सिंह सैनी को प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाया था। 2019 में नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीता था। इससे पहले वे 2014 से 2019 तक नारायणगढ़ हलके से विधायक रहे।
मनोहर पार्ट-। में सैनी को राज्य मंत्री भी बनाया गया था। लगभग छह महीने पहले भाजपा ने उन्हें ओमप्रकाश धनखड़ की जगह पार्टी प्रदेशाध्यक्ष बनाया था। सैनी ने बिना विधायक बने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है। ऐसे में उन्हें छह महीनों के अंदर विधानसभा की किसी भी सीट से चुनाव जीतना होगा। लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा के चुनाव करीब 6 महीने बाद होंगे।
नियमों के हिसाब से नायब सैनी को 11 सितंबर से पहले विधायक बनना जरूरी है। हरियाणा विधानसभा के चुनाव क्योंकि अक्तूबर में होने हैं, इसी वजह से पूर्व सीएम मनोहर लाल ने इस्तीफा दिया, जिससे सैनी को करनाल से चुनाव लड़वाया जा सके। इस तरह का यह पहला मामला है, जब केवल 4 महीने के बाद कोई विधायक बनेगा। 4 जून को चुनावी नतीजे घोषित होंगे। ऐसे में सैनी जून से सितंबर तक ही विधायक होंगे। इसके बाद उन्हें फिर से विधानसभा चुनावों में जाना होगा।
इस सरकार में चौथा उपचुनाव मनोहर पार्ट-।। में अब तक तीन उपचुनाव हो चुके हैं। करनाल में चौथा उपचुनाव होगा। सबसे पहले बरोदा हलके में कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन की वजह से उपचुनाव हुआ था। इसमें कांग्रेस के इंदूराज नरवाल ने भाजपा-जजपा गठबंधन प्रत्याशी योगेश्वर दत्त के मुकाबले जीत हासिल की थी। इसके बाद ऐलनाबाद में हुए उपचुनाव में इनेलो के अभय सिंह चौटाला ने गठबंधन के गोबिंद कांडा को शिकस्त दी। पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई के कांग्रेस में शामिल होने के चलते उन्होंने आदमपुर हलके से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने कुलदीप के बेटे भव्य बिश्नोई को चुनावी मैदान में उतारा। इस उपचुनाव में गठबंधन प्रत्याशी ने कांग्रेस के जयप्रकाश ‘जेपी’ को हराकर विधानसभा पहुंचने में कामयाबी हासिल की।
19 साल बाद कोई सीएम लड़ेंगे उपचुनाव: 2005 के बाद यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री को उपचुनाव में उतरना पड़ेगा। उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किलोई हलके से चुनाव लड़ा था।