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Tuesday, August 9, 2022

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कुलदीप बिश्‍नोई ने विधायक पद से दिया इस्‍तीफा, भाजपा संग शुरू करेंगे नई सियासी पारी

चंडीगढ़ (नेशनल प्रहरी/ संवाददाता) : हरियाणा में कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कुलदीप बिश्‍नोई ने हरियाणा विधानसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया है। अब वह भाजपा के साथ नई सियासी पारी शुरू करेंगे। उन्‍होंने हरियाणा विधानसभा के स्‍पीकर को अपना इस्‍तीफा सौंपा। अब वह छह साल बाद कांग्रेस को फिर अलविदा कहेंगे। वह 4 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंंगे। इस तरह हिसार जिले की आदमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय हो गया है।
कुलदीप बिश्‍नोई ने हुड्डा को दी आदमपुर सीट से उपचुनाव लड़ने की चुनौती: कुलदीप बिश्‍नोई आज हरियाणा विधानसभा के स्‍पीकर ज्ञानचंद गुप्‍ता से मुलाकात की और आदमपुर सीट से अपना इस्‍तीफा उनको सौंपा। इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा के डिप्‍टी स्‍पीकर रणवीर गंगवा, कुलदीप बिश्‍नोई की पत्‍नी रेणुका बिश्‍नोई भी साथ भी थीं।
इस मौके पर कुलदीप ने पूर्व सीएम व कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर हमला किया और उनको अपने खिलाफ आदमपुर से उपचुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्‍होंने कहा कि भाजपा नेतृत्‍व व आदमपुर की जनता चाहेगी तो वह खुद या उनके पुत्र भव्‍य बिश्‍नोई आदमपुर सीट से उपचुनाव लड़ेंगे। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि मैंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा का चैलेंज मानकर इस्‍तीफा दे दिया। अब अब हुड्डा मेरे या मेरे बेटे के खिलाफ आदमपुर से चुनाव लड़ें। यह मेरा चैलेंज है।
विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता से मिलकर दिया आदमपुर से इस्तीफा: आदमपुर के कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई बृहस्पतिवार को भाजपा का दामन थाम सकते हैं। विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए उन्होंने विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। वह कल दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में भगवा रंग में रंग जाएंगे। कुलदीप ने कल ही ट्वीट कर अपने नए सियासी सफर का ऐलान कर दिया था।
छह साल पहले अपनी पार्टी हजकां का कांग्रेस में किया था विलय: कुलदीप ने छह साल पहले अपने पिता स्व. भजनलाल द्वारा बनाई पार्टी हजकां का कांग्रेस में विलय कर लिया था, जिससे अब वह दोबारा नाता तोड़ने वाले हैं। हरियाणा कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से नाराज कुलदीप बिश्नोई ने राज्यसभा चुनाव में क्रासवोटिंग करते हुए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा को वोट दिया था, जिस कारण वह जीत गए और कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन चुनाव हार गए थे।
राष्ट्रपति चुनाव में भी कुलदीप ने एनडीए की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मु को अपना वोट दिया था। कांग्रेस उन्हें कार्यसमिति के सदस्य पद से पहले ही हटा चुकी है। कुलदीप पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल के बेटे हैं। वह हिसार व भिवानी से सांसद रह चुके हैं।
ट्वीट कर कल भाजपा में शामिल होने का कुलदीप ने दिया था संकेत: कुलदीप बिश्नोई ने अपने ट्वीटर हेंडिल पर मंगलवार को चार अगस्त 10-10 लिखकर कांग्रेस को अलविदा कहने का संकेत दिया, जिसके बाद इंटरनेट मीडिया पर उनके भाजपा में शामिल होने का स्वागत और कांग्रेस को अलविदा कहने पर तरह-तरह की टिप्पणियां शुरू हो गई।
प्रदेश में गठबंधन की सरकार के तीसरे साल में ही तीसरा उपचुनाव तैयार: कुलदीप बिश्नोई के विधानसभा के इस्तीफा देने के बाद आदमपुर में उपचुनाव तय है। भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार में यह तीसरा उपचुनाव होगा। सबसे पहले सोनीपत जिले की बरौदा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। बरौदा के कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन की वजह से यहां उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस के इंदुराज नरवाल जीते।
दूसरा उपचुनाव सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर हुआ। किसान संगठनों के आंदोलन के समर्थन में इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने यहां से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में दोबारा फिर अभय सिंह चौटाला ही जीते। यानी दोनों उपचुनाव में भाजपा-जजपा गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। अब आदमपुर में कुलदीप बिश्नोई के इस्तीफा देने के बाद फिर से उपचुनाव के हालात हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस आदमपुर में उपचुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
राजनीति में देखे कई उतार चढ़ाव: कुलदीप बिश्नोई के पिता स्व. भजनलाल ने 2007 में हजकां-बीएल बनाई थी। उसके बाद भाजपा के साथ गठबंधन में भी रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पार्टी हजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। जून 2011 में भजन लाल के देहांत के बाद कुलदीप ने पार्टी की कमान संभाली थी।
2009 के विधानसभा चुनाव में हजकां ने छह सीटें जीती, जिनमें से पांच विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार बनाने के लिए तोड़ लिए थे। हालांकि 2014 में पांचों विधायकों की सदस्यता दलबदल कानून के तहत रद कर दी गई थी। 28 अप्रैल 2016 को कुलदीप ने हजकां का विलय कांग्रेस में कर दिया था। छह साल बाद अब फिर से उनकी सियासी राह कांग्रेस से अलग होने वाली है।

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